खल्लारी मंदिर पर मौत का साया! जर्जर रोपवे टूटा, श्रद्धा की राह में मौत का झूला… एक जान गई, पाँच जिंदगियाँ मौत से लड़ रही हैं! प्रशासन-ट्रस्टी की लापरवाही ने ली मासूम की जान - Bebaak Bayan

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Sunday, March 22, 2026

खल्लारी मंदिर पर मौत का साया! जर्जर रोपवे टूटा, श्रद्धा की राह में मौत का झूला… एक जान गई, पाँच जिंदगियाँ मौत से लड़ रही हैं! प्रशासन-ट्रस्टी की लापरवाही ने ली मासूम की जान




महासमुंद (रिपोर्टर मयंक गुप्ता): चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर माता खल्लारी के दरबार में श्रद्धालुओं का ताँता लगा हुआ था। पहाड़ की चोटी पर स्थित मंदिर तक पहुँचने का एकमात्र सहारा—वो पुराना रोपवे—आज मौत का झूला बन गया। अचानक तार टूटा, केबिन नीचे गिरा… और एक पल में छह परिवारों की दुनिया उजड़ गई। एक महिला की जान चली गई, पाँच अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। पूरा इलाका गुस्से और दर्द से भरा हुआ है।

क्या हुआ था हादसा?

जिले से करीब 30 किलोमीटर दूर ग्राम खल्लारी में माता के दर्शन के लिए उमड़ रहे हजारों श्रद्धालुओं में से छह लोग रोपवे में सवार हुए। केबिन ऊपर चढ़ ही रहा था कि अचानक स्टील का मेन तार चटख गया। बिना किसी चेतावनी के केबिन अनियंत्रित होकर तेजी से नीचे गिर पड़ा। हादसा इतना भयानक था कि केबिन के अंदर मौजूद सभी श्रद्धालु बुरी तरह घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग दौड़ पड़े। घायलों को तुरंत बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया गया। वहाँ डॉक्टरों की तत्काल कोशिशों के बावजूद एक महिला की मौत हो गई। बाकी पाँच घायलों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है—कई की हड्डियाँ टूटी हैं, खून बह रहा है और आशंका है कि कुछ की हालत और बिगड़ सकती है।

बड़ा सवाल—आखिर जिम्मेदार कौन?

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खल्लारी मंदिर का यह रोपवे सालों पुराना और पूरी तरह जर्जर हो चुका था। बार-बार मरम्मत, नियमित तकनीकी जांच और सुरक्षा प्रमाण-पत्र की माँग की गई, लेकिन मंदिर ट्रस्टी और प्रशासन ने इसे लगातार नजरअंदाज किया। कोई फिटनेस सर्टिफिकेट, कोई वार्षिक ऑडिट, कोई इमरजेंसी प्रोटोकॉल… कुछ भी नहीं था।

लोग पूछ रहे हैं—

चैत्र नवरात्र जैसे बड़े पर्व पर हजारों श्रद्धालु रोजाना आते हैं, फिर भी रोपवे को बिना चेक किए चालू रखने की इजाजत किसने दी?

मंदिर ट्रस्टी ने पिछले कई सालों से मिले फंड का इस्तेमाल रोपवे की मरम्मत पर क्यों नहीं किया?

जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने इतने खतरनाक रोपवे को बंद करने का आदेश क्यों नहीं दिया?

यह हादसा कोई अचानक दुर्घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा है। आस्था के नाम पर लोगों की जान से खेला गया।

आक्रोश और माँगें

हादसे के बाद खल्लारी और आसपास के गाँवों में भारी गुस्सा फूट पड़ा है। सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए। उन्होंने मंदिर ट्रस्टी, जिला कलेक्टर और पुलिस पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य माँगें:

दोषी अधिकारियों और ट्रस्टी पर तत्काल मुकदमा दर्ज हो

रोपवे की पूरी जांच हो और दोषियों को जेल भेजा जाए

मृतक परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा और घायलों को उचित इलाज व मुआवजा

तुरंत नए और सुरक्षित रोपवे का निर्माण शुरू किया जाए

निष्कर्ष—सिस्टम की नाकामी का सबक

यह सिर्फ एक रोपवे का हादसा नहीं है। यह उस सिस्टम की नाकामी है जो आस्था को कमाई का जरिया समझती है, लेकिन सुरक्षा को तुच्छ मानती है। हर साल नवरात्र में लाखों श्रद्धालु पहाड़ चढ़ते हैं। क्या हर बार मौत का इंतजार करना पड़ेगा? क्या अब भी जिम्मेदार लोग सिर्फ बयान देंगे और मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

अब समय है सख्ती का।

अगर आज कार्रवाई नहीं हुई तो कल कोई और माँ-बहन, कोई और बेटा इसी मौत के झूले पर सवार हो सकता है।

माता खल्लारी की जय… लेकिन अब सुरक्षा भी चाहिए!

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages